सावन में आग लग गई................

जबसे जिन्दगी एक हसीन सफ़र बन गई |
दिल को उसी दिन से नई तलब लग गई ||

जालिम जमाना कहता सावन बरस रहा |
मगर हम कह रहे सावन में आग लग गई ||


श्केहर कुमावत

29 टिप्‍पणियां:

  1. are waah..........bhari garmi mein sawan le aaye aur usmein aag bhi laga di........gazab kar diya...........bahut sundar .

    उत्तर देंहटाएं
  2. शेखर बाबू आपके ऐसे इस दिलकश सफ़र में हमें भी कभी शामिल करें.......लेखनी में सुधार लगातार.
    kaa अपनी माटी
    माणिकनामा

    उत्तर देंहटाएं
  3. अब ये तो सावन सावन की बात है....बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह ! क्या बात है,सुन्दर रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  5. लिखा ठीक है लेकिन बात पूरी करो । आपकी रचना गहराई मे उतरना चाहती ...... उस कथ्य तक ले चलो ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. लिखा ठीक है लेकिन बात पूरी करो । आपकी रचना गहराई मे उतरना चाहती ...... उस कथ्य तक ले चलो ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. क्या बात है भाई ... बहुत romantic हो रहे हैं ... कहीं कोई ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. bahut sundar ek achhi rachna ....chaar panktiyya par ...laajavaab

    http://athaah.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  9. वे कहते सावन..
    हमें आग लग रही...

    दृष्टिकोण पनप रहा है....आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर लिखा...बधाई.
    ______________
    'पाखी की दुनिया' में 'वैशाखनंद सम्मान प्रतियोगिता में पाखी' !

    उत्तर देंहटाएं
  11. bhai likha hai

    aag lagi hai dil me
    najar aati nahi
    magar jajbaaton ka baag
    mahkne yu hi to lagta nahi

    उत्तर देंहटाएं
  12. सावन तो आने देते फिर आग लगते .....!!

    उत्तर देंहटाएं
  13. आपने फोटो इतना ग़ज़ब लगा रखा है की सावन में आग लग ही जाएगी ... बहुत खूब लिखा है ...

    उत्तर देंहटाएं
  14. अति सुन्दर। चित्र भी बहुत बढ़िया हैं।

    उत्तर देंहटाएं

Facebook Badge