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दिल की दुरी.................
दिल की दुरी को कदमो से ना मिटा सके ।
जज्बातों की आग को ना आँखों से बुझा सके ।।
एक वादा था उस मोड़ तक साथ चलने का ।
जिसे न तुम निभा सके न हम निभा सके ।।
Dil Ki Duri Ko Kadmo Se Na Mita Sake.
Jajbato Ki Aag Ko Na Aankho Se Bujha Sake.
Ek Wada Tha Us Mod Tak Sath Chalne Ka.
Jise Na Tum Nibha Sake Na Ham Nibha Sake.
© Shekhar Kumawat
उनसे मोहब्बत हो गयी..................
वाकिया ये हुआ की उनसे मोहब्बत हो गयी...
उन के दीदार में खुदा की इबादत हो गयी ...
अक्सर दूरिया इश्क की सिद्दत को बड़ा देती है ...
इसलिए तो उनकी दर भी जियारत हो गयी ....
Wakiya Ye Hua Ki Unse Mohabbat Ho Gayi.
Un Ke Didar Me Khuda Ki Ibaddat Ho Gayi.
Aksar Duri Ishq Ki Siddat Ko Bada Deti Hai.
Isliye To Unki Dar Bhi Ab Jiyarat Ho Gayi Hai....
Un Ke Didar Me Khuda Ki Ibaddat Ho Gayi.
Aksar Duri Ishq Ki Siddat Ko Bada Deti Hai.
Isliye To Unki Dar Bhi Ab Jiyarat Ho Gayi Hai....
© Shekhar Kumawat
शेखर कुमावत की बात
नमस्कार साथियों ,
सबसे पहले में आप सब का तह : दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ ! क्यूँ की मुझे आप सब लोगो का भरपूरप्यार जो मिलता रहा है , अतः इस नाचीज़ को आप ने सराहा इस के लिए में आप सब का शुक्रगुजार हूँ |
मुझे रोज़ आप लोगो की प्यार भरी ढेर सारी टिप्पणियाँ मिलती है उससे मेरा दिल खुश नसीब इन्सान की तरहगद-गद हो जाता हे, लग भग एक महीने से मेरे द्वारा लिखी गई , कवितायेँ और मुक्तक को आप पड़ते रहे हैं , किन्तु मुझे धीरे-धीरे ये ज्ञात होने लगा हे कि मैं जिस काम को करने के लिए सोच रहा हूँ या सपने देखता हूँ उसके लिए मुझे बहुत मेहनत करनी होगी आम तौर पर मिलने वाली टिप्पणियाँ मेरी पोस्ट को ठीक-ठीक हीबतादेती हे , किन्तु कुछ खास और बुद्धिजीवी की बातो पर जब मैंने गौर किया तो मुझे ज्ञात हुवा कि बहुत मेहनत करने की जरुरत है , खास तोर पर किसी भी पोस्ट को प्रकाशित करने से पहले उसके बारे में हर दृष्टी कोण से सोचविचार करना चाहियें | आये दिन पिताजी भी कहते है कि मुझे ज्यादा से ज्यादा अच्छे लेखकों की किताबे पढनाऔर उन लोगो के जीवन के बारे में गहन अध्यन करना चाहियें , ताकि मै भी अपना निष्पक्ष मूल्यांकन कर सकू |
मुझे उमीद है की मै भविष्य मै इस से भी बहतर करने की मेरी और से लाजवाब कोशिस जारी रहेगी |
शेखर कुमावत
सबसे पहले में आप सब का तह : दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ ! क्यूँ की मुझे आप सब लोगो का भरपूरप्यार जो मिलता रहा है , अतः इस नाचीज़ को आप ने सराहा इस के लिए में आप सब का शुक्रगुजार हूँ |
मुझे रोज़ आप लोगो की प्यार भरी ढेर सारी टिप्पणियाँ मिलती है उससे मेरा दिल खुश नसीब इन्सान की तरहगद-गद हो जाता हे, लग भग एक महीने से मेरे द्वारा लिखी गई , कवितायेँ और मुक्तक को आप पड़ते रहे हैं , किन्तु मुझे धीरे-धीरे ये ज्ञात होने लगा हे कि मैं जिस काम को करने के लिए सोच रहा हूँ या सपने देखता हूँ उसके लिए मुझे बहुत मेहनत करनी होगी आम तौर पर मिलने वाली टिप्पणियाँ मेरी पोस्ट को ठीक-ठीक हीबतादेती हे , किन्तु कुछ खास और बुद्धिजीवी की बातो पर जब मैंने गौर किया तो मुझे ज्ञात हुवा कि बहुत मेहनत करने की जरुरत है , खास तोर पर किसी भी पोस्ट को प्रकाशित करने से पहले उसके बारे में हर दृष्टी कोण से सोचविचार करना चाहियें | आये दिन पिताजी भी कहते है कि मुझे ज्यादा से ज्यादा अच्छे लेखकों की किताबे पढनाऔर उन लोगो के जीवन के बारे में गहन अध्यन करना चाहियें , ताकि मै भी अपना निष्पक्ष मूल्यांकन कर सकू |
मुझे उमीद है की मै भविष्य मै इस से भी बहतर करने की मेरी और से लाजवाब कोशिस जारी रहेगी |
शेखर कुमावत
काव्य 'वाणी'
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