काव्य वाणी
Shekhar Kumawat's Blog
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मेरे मन मंदिर में...
जब से बसा लिया मन, सांवरिया तेरी गली में |
पी लिया अमृत मैने, तेरी बांसुरी की धुन में ||
तोड़
दिए है मैने सारे नाते, इस बैरी जग के |
अब आ जाओ मनमोहन, मेरे मन मंदिर में ||
:-Shekhar Kumawat
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