दूर रहती तो है .........
दूर रहती तो है पर सताती बहुत है ।
भुलाता तो हूँ पर याद आती बहुत है ।।
भुलाता तो हूँ पर याद आती बहुत है ।।
बात ख्वाबो तक हो तो ठीक थी ।
मगर जहन में आती बहुत है ।।
मगर जहन में आती बहुत है ।।
तेरे आने का...........
तेरे आने का इंतजार करती है निगाहें ।
कुछ ना कहो तो भी कहती है निगाहें ।।
आलम-ए-मंज्जर कुछ ऐसा है दिल का ।
एक मुद्दत से राह पे टिकायें रखी है निगाहें ।।
Tere aane ka intjaar karti he NIGAHEN.
Kuchh na kaho to bhi kahti he NIGAHEN.
Alam-E-Manjjar kuchh aisa he DIL ka.
Ek muddat se rah pe tikayen rakhi he NIGAHEN.
© 'शेखर कुमावत'
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