राज़ बयां होने दो ...................

आज मुझे फिर , मदहोश होने दो |
पी-पी कर जाम, सारा होश खोने दो ||

ना रोको मुझे जालिम ज़माने वालो |
आज दिल का हर राज़ बयां होने दो
||


:-शेखर कुमावत

24 टिप्‍पणियां:

  1. मदहोश और जेहादी होइए लेकिन इंसानियत को बचाने के लिए ,अच्छी प्रस्तुती /

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  2. वाह क्या बात है.........आकर्षक प्रस्तुति

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  3. वाह! बहुत सुन्दर, लेकिन कुछ अधूरी सी लग रही है !

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  4. नीलेश माथुर जी से सहमत। सुन्दर, लेकिन ’वो’ बात अधूरी सी कर गया।

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  5. हमेशा की तरह एक सुंदर अभिव्यक्ति..बढ़िया लगी बधाई..

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  6. Aah! Kya peeke madhosh hon,jab koyi jaam asar na kare!

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  7. आपके शेर पर एक शेर याद आ गया जो मैंने शायद १९७२-७३ में लिखा होगा.....

    हँस कर गुज़ार दो जो वक्त ज़िंदगी का
    असल में उसी को जीना कहते हैं
    मय मयखाने में जा कर पी तो क्या पी
    जो अश्कों को पी ले उसीको पीना कहते हैं.....संगीता

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  8. बढ़िया लिखा है ,,,,इस पेशकश को कुछ आगे बड़ा दो ,,,अधूरी सी है..//// इतने दिन कहाँ थे ....हमारी याद नहीं आई क्या ?....एक-दो दिन में कुछ-ना-कुछ लिखते रहा करो ...

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  9. आज फिर मुझे, मदहोश होने दो |
    पी लेने दो जाम, फिर होश खोने दो ......bahut badhiya.

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  10. abhi tuarant arvind ji ki rachna
    मत पीबय शराब सजना रे, मति पीबय.
    padh kar aaya hoon aur phir aapki rachna.....
    sikke ke do pehloo.....
    achii rachna,...

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  11. SANGEETA JI AAPNE BAHUT KHOOB LIKHA HAI AAPKE ES PEENE BALE SHER KO PAD KAR DIL ROMANCHIT HO GAYA WONDERFULL

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  12. वाह ... जो कहना हो वैसे ही कह दो ... जी भर ले कह दो .. लाजवाब शेर ...

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  13. :)

    kyaa kahun...

    sab guni jan to kah gaye hain.....

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  14. पी लेने दो जाम, फिर होश खोने दो ......bahut badhiya

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  15. कुमावत जी, पीने की लालसा जगा दी आपने। मैं शराब की नहीं आपके काव्‍य की बात कर रहा था।

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