तड़प-ए-दिल...

ये दूरियां तो हमने ने बनाए रखी है । 
रीती - रिवाजो में उलझाए रखी है ।।
वो क्या समझेंगे तड़प-ए-दिल की । 
जिन्होंने बेड़ियां इज्जत की पहन रखी है ।। 



Ye Duriyan To Hamne Banaye Rakhi H.
Riti - Riwajo Me Ulja Rakhi H. 
Wo Kya Samjhenge Tadap-e-dil Ki. 
Jinhone Bediya Ijjat Ki Pahan Rakhi H. 


© Shekhar Kumawat

3 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, आज बातें कम, लिंक्स ज्यादा - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. बहुत ही शानदार रचना की प्रस्‍तुति।

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  3. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार....

    उत्तर देंहटाएं

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