फिर भी ऐसी क्या बात हो गई ....................


तेरी हँसी जिगर के पार हो गई ,
तू रूठी तो आसुंओ की धार हो गई |

बाते नकद की ,
सभी क्यूँ उधार हो गई ||

हाय तेरा रूठ जाना ,
मेरा
बार बार मनाना |

हम तो दिल के मारे हें ,
और तू किस्मत की मारी हे ||





शेखर कुमावत

11 टिप्‍पणियां:

  1. तेरी हँसी जिगर के पार हो गई ,
    तू रूठी तो आसुंओ की धार हो गई |
    vaah.......bahut sundar

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  2. sach kahu assi koi bat nahi he ab tak
    na jane kese likh liya muje bhi nahi pata

    shekhar kumawat

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  3. "rooth kar jo baith gai ho
    man zara bhi jao tum
    apne is aashiq deewane ko
    itna mat tarsao tum"
    aji maan bhi jaiye kyun aapni dillagi ko is tarah chupa rahe hain

    उत्तर देंहटाएं
  4. तेरी हँसी जिगर के पार हो गई ,
    तू रूठी तो आसुंओ की धार हो गई |

    जानता हूँ में तेरी मज़बूरी को ,
    फिर भी ऐसी क्या बात हो गई ||

    बहुत खूब .....!!

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