तेरा दीदार


पूर्णिमा की रात, होगा बेशक तेरा
दीदार किसी तरह |
मगर निकल गया बेवफा ये आसमां भी तेरी तरह ||

उस रात, रात भर छाई घटायें फलक में चारो ओर |
चाँद दिखा ना तुम दिखे , अमावस्या की तरह ||

शेखर कुमावत

11 टिप्‍पणियां:

  1. लो जी आशीर्वाद चाँद भी दिख जायेगा।

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  2. chinta mat kijiye..
    dono ka didaar hoga...

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  3. क्या बात है, अभी अभी मैं ऐसे इस विषय पर लिख रही थी और तुमने पहले ही लिख के रखा है. बहुत सुन्दर.

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  4. ज़रा पलट और फ़िर से देख
    चाँद झाँक रहा है मेरी तरह...

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  5. सुन्दर रचना!
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    मंगलवार के साप्ताहिक काव्य मंच पर इसकी चर्चा लगा दी है!
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  6. अहसासों की खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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