" वाह क्या ताज है ".........

ये मोहब्बत की क्या खूब इबादत है |
फरिस्ते भी दुआ मांगे ऐसी जियारत है ||
गजब का करिश्मा है ताज कारीगरी में |
जो हर शक्श कहे "वाह क्या इमारत  है "||

 


Ye Mohabbat Ki Kya Khub Ibadat Hai .
Fariste Bhi Dua Mange Isi Jiyarat Hai ..

Gajab Ka Karishama Hai Taj Ki Karigari Me.
Jo Har Shaksh Kahe "Wah Kya Imarat Hai..

 © Shekhar Kumawat

एक खता........

एक खता हमसे नहीं होती । 
एक खता उनसे नहीं होती ॥ 
ना जाने कोनसी खता हुई हमसे । 
जो ये खता फिर से नहीं होती  ॥ 

 

 © Shekhar Kumawat

जीने नहीं देता .........

फासला तुम्हे भूलने नहीं देता.
खुली आँखों में खवाब दिखा देता.
ये कैसी कसम दिलाई है तुमने.
जो जीकर भी जीने नहीं देता ....

 © Shekhar Kumawat

खुदा की इबादत ........

मोहब्बत भी गजब की शय होती है..
कभी दर्द तो कभी दवा होती है .
गर हो जाये ये हसीन खता किसी से ..
तो खता भी खुदा की इबादत होती है ......

 © Shekhar Kumawat

तड़फोगे तुम भी....

तड़फोगे तुम भी उतना जितना तड़फाओगे |
हाले दिल तमाम खुद ब खुद जान जाओंगे ||
गर है कोई शिकवा मुझसे तो दूर करलें |
वरना एक रोज तुम बहुत पछताओगे ||


© Shekhar Kumawat

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