खुदा की इबादत ........

मोहब्बत भी गजब की शय होती है..
कभी दर्द तो कभी दवा होती है .
गर हो जाये ये हसीन खता किसी से ..
तो खता भी खुदा की इबादत होती है ......

 © Shekhar Kumawat

तड़फोगे तुम भी....

तड़फोगे तुम भी उतना जितना तड़फाओगे |
हाले दिल तमाम खुद ब खुद जान जाओंगे ||
गर है कोई शिकवा मुझसे तो दूर करलें |
वरना एक रोज तुम बहुत पछताओगे ||


© Shekhar Kumawat

बंद आंखो के सपने

बंद आंखो के सपने कहा साकार होते |
बातो से रास्ते कहा आसान होते || 

वतन  की मांग है जागो-उढो-चलो | 
क्योकी तबदिली बुलन्द होसलो से होते || 


© Shekhar Kumawat

कोई मौत को तरसता

कोई जमी तो कोई आसमां को तरसता |
बेरहम दुनिया में कोई अपनों को तरसता ||

गर इतना आसां होता जीना इस दुनिया में |
फिर क्यूँ कोई बेदर्द मौत को तरसता ||




"
शेखर कुमावत"

नवा साल रो राम राम |

२०११ रा अणि आखरी दन में राजस्थानी विषय माय M.A. (पूर्वार्द्ध ) रो पेलो पर्चो दियो (आधुनिक राजस्थानी गघ साहित्य MARJ 01 ) अन अपने मन मे गणों ही चौखो लाग रियों है | जानेक मारी मायड माटी रो करज उतारवन वास्ते मे पेलो कदम उठायो अन अणि अनुभव सु मारो मन और भी तगडो वैंग्यो माटी री अणि भाषा माय और भी पेठा माय उतरबा रो मन होई गयों है |



आप सगला ने नवा साल री गनी गनी राम राम बचावसी |

आप रो लाडलो मोट्यार
"शेखर कुमावत"

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