नवा साल रो राम राम |

२०११ रा अणि आखरी दन में राजस्थानी विषय माय M.A. (पूर्वार्द्ध ) रो पेलो पर्चो दियो (आधुनिक राजस्थानी गघ साहित्य MARJ 01 ) अन अपने मन मे गणों ही चौखो लाग रियों है | जानेक मारी मायड माटी रो करज उतारवन वास्ते मे पेलो कदम उठायो अन अणि अनुभव सु मारो मन और भी तगडो वैंग्यो माटी री अणि भाषा माय और भी पेठा माय उतरबा रो मन होई गयों है |



आप सगला ने नवा साल री गनी गनी राम राम बचावसी |

आप रो लाडलो मोट्यार
"शेखर कुमावत"

तुम से बेवफाई

आज जो तुम से बेवफाई कर रहा हूँ |
दिल पर एक पत्थर सा रख रहा हूँ ||

यु ही नहीं ठुकराता कोई सच्चे प्यार को |
बस यही बात खामोशी से कह रहा हूँ ||


For Sweet Metu

Shekhar Kumawat

मेरी कश्ती क्यूँ डुबोई ?

गम इस बात का नहीं, कि मेरी कश्ती क्यूँ डुबोई |
गम इस बात का है , कि अपनों ने क्यूँ डुबोई ||

हम तो फिर भी जी लेते कश्ती बदल कर |
फिर मगर उस कम्बक्त ने अपनी क्यूँ डुबोई ||


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Shekhar Kumawat :-

खुशबू में मेरी दुआ मिली है

मेंहंदी लगी है तेरे हाथों में ,वो मुझे भी देखनी है |
रची है कितनी मेरे प्यार की ,वो भी देखनी है ||

आज होगी आजमाईश मेरी भी मुहब्बत की |
क्योंकि मेहंदी की ''खुशबू'' में मेरी दुआ मिली है ||




:-Shekhar Kumawat

हैं माँ

हैं माँ
मेने देखा
मैंने समझा

ये दुनिया कितनी छोटी हे
और तेरा आँचल कितना बड़ा हे

तेरे आँचल में मिले मुझे लाख फूल
दुनिया में मिले हर कदम पर शूल

तुने हर कदम पर संभाला
जहाँ ने हर कदम पर गिराया

सबसे बड़ा तेरा दिल
बाकी ये सब पत्थर दिल

बस माँ तेरा तेरा आँचल मिले
रख कर उस में सिर

मीठी मीठी लोरी सुनु
प्यारी प्यारी बाते सुनु

हा माँ तेरा आँचल मिले
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:- Shekhar Kumawat

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