दर्द का ये आलम.......

दर्द का ये सेलाब , अब कम होगा |
आंसुओ का बहना, अब बंद होगा ||

फिर कैसे भूल जाऊ तेरी यांदो को |
बिन तेरे तो जीना भी आसाहोगा ||
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:- शेखर कुमावत

शबनम के ये घूंट

शबनम के ये घूंट मुझे और ना पिला साकी |
मंजिल है दूर मेरे कदमो को ना रोक साकी ||

यहीं डगमगा ना जाऊ तेरे इश्क मे कहीं |
मेरे खवाब भी हकीकत मे बदलने दे साकी ||


:- Shekhar Kumawat

तुम से रूठ कर.......

तुम से रूठ कर कहाँ जायेंगे हम |
दिल
तेरा तोड़ कर क्या पाएंगे हम ||

ये तो दुनिया का रिवाज है प्रीतम |
जो बिछड़ कर ही मिल पाएंगे हम ||


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:- Shekhar Kumawat

तेरा दीदार


पूर्णिमा की रात, होगा बेशक तेरा
दीदार किसी तरह |
मगर निकल गया बेवफा ये आसमां भी तेरी तरह ||

उस रात, रात भर छाई घटायें फलक में चारो ओर |
चाँद दिखा ना तुम दिखे , अमावस्या की तरह ||

शेखर कुमावत

माँ ऐसा वरदान दिजो

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माँ ऐसा वरदान दिजो, जो नित करूँ सेवा तेरी |
तन मन धन सब अर्पित करूँ, चरणों मे तेरी ||

हो सबकी इच्छा पूरी ,करूँ हाथ जोड़ ये विनती |
माँ जगजननी कृपा करो, आया मै शरण तेरी ||


आप सभी को नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं...........
नवरात्री में नवदुर्गा से मन की कामना ये है ......


:-Shekhar Kumawat


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