तुम से रूठ कर.......

तुम से रूठ कर कहाँ जायेंगे हम |
दिल
तेरा तोड़ कर क्या पाएंगे हम ||

ये तो दुनिया का रिवाज है प्रीतम |
जो बिछड़ कर ही मिल पाएंगे हम ||


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:- Shekhar Kumawat

तेरा दीदार


पूर्णिमा की रात, होगा बेशक तेरा
दीदार किसी तरह |
मगर निकल गया बेवफा ये आसमां भी तेरी तरह ||

उस रात, रात भर छाई घटायें फलक में चारो ओर |
चाँद दिखा ना तुम दिखे , अमावस्या की तरह ||

शेखर कुमावत

माँ ऐसा वरदान दिजो

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माँ ऐसा वरदान दिजो, जो नित करूँ सेवा तेरी |
तन मन धन सब अर्पित करूँ, चरणों मे तेरी ||

हो सबकी इच्छा पूरी ,करूँ हाथ जोड़ ये विनती |
माँ जगजननी कृपा करो, आया मै शरण तेरी ||


आप सभी को नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं...........
नवरात्री में नवदुर्गा से मन की कामना ये है ......


:-Shekhar Kumawat


मेरे मन मंदिर में...


जब से बसा लिया मन, सांवरिया तेरी गली में |
पी लिया अमृत मैने, तेरी बांसुरी की धुन में ||

तोड़ दिए है मैने सारे नाते, इस बैरी जग के |
अब आ जाओ मनमोहन, मेरे मन मंदिर में ||



:-Shekhar Kumawat

पहले प्यार का गम......


पहले प्यार का गम किसे नहीं होता |
आखरी सलाम का दर्द किसे नहीं होता ||

उस नादानी की सजा उम्र भर मिलती है |
जबभी यादों का समंदर उफान पर होता ||


:-Shekhar Kumawat

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