उठा भी दो पर्दा...........

कोई बात तो होगी मुझमे भी|
लगन लगी है
जो तुझमे भी ||

उठा भी दो पर्दा अब चहरे से |
प्रीत जगी है अब मुझमे भी ||


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शेखर कुमावत

राखी का बंधन

जिन्दगी को खुदा के दिए हुए जो तोहफे होते |
रिश्तों की भीड़ में बस, वही रिश्ते अनमोल होते ||

सारे जहां में सबसे बदनसीब है , वे तमाम भाई |
जो मतलबों के खातीर अपनी बहनों को खोते ||

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Shekhar Kumawat


ऐसा हो मेरा दोस्त


दोस्त ऐसा हो जो दिल में बस जाए |
सुरमे की तरहां आँखों में सज जाए ||
जब भी वक़्त दोस्ती का इम्तिहां ले |
वो सोने सा कसौटी पर कस जाए ||




:- शेखर कुमावत


की वो साथ नहीं ............


जो ख़्वाबों मे था , वो हकीकत नहीं |
जिसके सपने संजोये वो जन्नत नहीं ||

अरमानों के मोती जो हमने चुने कभी |
ज़माने के बाजारों मै हकीकत नहीं ||

मेरी किस्मत ने भी मुझे दगा दे दिया |
फिर भी खुदा से कोई शिकायत नहीं ||

अब याद ना कर 'शेखर' बार बार उसे |
खुश किस्मत ही समझ कि वो साथ नहीं ||



:- शेखर कुमावत

हाय ! ऐसी मोहब्बत

इस भरी दोपहरी में, क्यूँ शमा जलाए बैठी हो |
किसका इंतजार है , जो द्वार खोले बैठी हो||

ये कैसी तलब है, जो पलके बिछाए बैठी हो|
ये कैसी तन्हाई है, जो बेचैन हुए बैठी हो||

निकला पतझड सावन, निकला बसंत-बहार |
किसका इंतजार है, जो आस लगाए बैठी हो ||

कैसे कैसे राज़ जो ख़ामोशी ने छिपायें रखे है |
हाय ! ऐसी मोहब्बत जो परदेसी से कर बैठी हो ||

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:- शेखर कुमावत

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