काव्य वाणी
Shekhar Kumawat's Blog
उठा भी दो पर्दा...........
कोई
बात
तो
होगी
मुझमे
भी|
लगन
लगी
है
जो
तुझमे
भी ||
उठा
भी
दो
पर्दा
अब
चहरे
से |
प्रीत
जगी
है
अब
मुझमे
भी ||
शेखर
कुमावत
राखी का बंधन
जिन्दगी
को
खुदा
के
दिए
हुए
जो
तोहफे
होते
|
रिश्तों
की
भीड़
में
बस,
वही
रिश्ते
अनमोल
होते
||
सारे
जहां
में
सबसे
बदनसीब
है ,
वे
तमाम
भाई |
जो
मतलबों
के
खातीर
अपनी
बहनों
को
खोते
||
Shekhar Kumawat
ऐसा हो मेरा दोस्त
दोस्त ऐसा हो जो दिल में बस जाए |
सुरमे की तरहां आँखों में सज जाए ||
जब भी
वक़्त
दोस्ती का इम्तिहां ले |
वो सोने सा कसौटी पर कस जाए ||
:-
शेखर
कुमावत
की वो साथ नहीं ............
जो ख़्वाबों मे था , वो हकीकत नहीं |
जिसके सपने संजोये वो जन्नत नहीं ||
अरमानों के मोती जो हमने चुने कभी |
ज़माने के बाजारों मै हकीकत नहीं ||
मेरी किस्मत ने भी मुझे दगा दे दिया |
फिर भी खुदा से कोई
शिकायत
नहीं ||
अब याद ना कर
'
शेखर
'
बार बार उसे |
खुश किस्मत ही समझ कि वो साथ नहीं ||
:-
शेखर
कुमावत
हाय ! ऐसी मोहब्बत
इस
भरी
दोपहरी
में
,
क्यूँ
शमा
जलाए
बैठी
हो
|
किसका
इंतजार
है
,
जो
द्वार
खोले
बैठी
हो
||
ये
कैसी
तलब
है
,
जो
पलके
बिछाए
बैठी
हो
|
ये
कैसी
तन्हाई
है
,
जो
बेचैन
हुए
बैठी
हो
||
निकला
पतझड
सावन
,
निकला
बसंत
-
बहार
|
किसका
इंतजार
है
,
जो
आस
लगाए
बैठी
हो
||
कैसे
कैसे
राज़
जो
ख़ामोशी
ने
छिपायें
रखे
है
|
हाय
!
ऐसी
मोहब्बत
जो
परदेसी
से
कर
बैठी
हो
||
:- शेखर कुमावत
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