ऐ हुस्न............


ऐ हुस्न मुझे तुझसे शिकायत नहीं ।
दूरियां मिटाने की तेरी कवायत नहीं ॥ 

मझबूर है तेरे कसमो और वादो से । 
वरना ये मोहब्बत इबादत से कम नहीं ॥

करते है इन्तजार हर रोज़ उस मोड़ पर । 
जहाँ से बढ़ने की मुझे इजाजत नहीं ॥ 

© Shekhar Kumawat

लगा कर महेंदी

लगा कर महेंदी मेरे नाम की  दिल को चुरा लिया । 
आई वो खुशबु जिसने मन को महका दिया ।।