" वाह क्या ताज है ".........

ये मोहब्बत की क्या खूब इबादत है |
फरिस्ते भी दुआ मांगे ऐसी जियारत है ||
गजब का करिश्मा है ताज कारीगरी में |
जो हर शक्श कहे "वाह क्या इमारत  है "||

 


Ye Mohabbat Ki Kya Khub Ibadat Hai .
Fariste Bhi Dua Mange Isi Jiyarat Hai ..

Gajab Ka Karishama Hai Taj Ki Karigari Me.
Jo Har Shaksh Kahe "Wah Kya Imarat Hai..

 © Shekhar Kumawat

एक खता........

एक खता हमसे नहीं होती । 
एक खता उनसे नहीं होती ॥ 
ना जाने कोनसी खता हुई हमसे । 
जो ये खता फिर से नहीं होती  ॥ 

 

 © Shekhar Kumawat