दर्द का ये आलम.......

दर्द का ये सेलाब , अब कम होगा |
आंसुओ का बहना, अब बंद होगा ||

फिर कैसे भूल जाऊ तेरी यांदो को |
बिन तेरे तो जीना भी आसाहोगा ||
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:- शेखर कुमावत