शबनम के ये घूंट

शबनम के ये घूंट मुझे और ना पिला साकी |
मंजिल है दूर मेरे कदमो को ना रोक साकी ||

यहीं डगमगा ना जाऊ तेरे इश्क मे कहीं |
मेरे खवाब भी हकीकत मे बदलने दे साकी ||


:- Shekhar Kumawat

10 टिप्‍पणियां:

  1. शबनम के ये घूंट मुझे और ना पिला साकी |
    मंजिल है दूर मेरे कदमो को ना रोक साकी ||
    Nihayat sundar!

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  2. बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

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  3. एक आध्यात्मिक छाप लिए इन रुबाइयों को पढकर यही ख्याल आया कि जब स्वप्न-जाल से बाहर निकलता है कोई तो ही उस सत्य के दर्शन होते हैं।

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  4. वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा

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  5. कदम से कदम मिला कर आगे बढ़ें.

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