मेरे मन मंदिर में...


जब से बसा लिया मन, सांवरिया तेरी गली में |
पी लिया अमृत मैने, तेरी बांसुरी की धुन में ||

तोड़ दिए है मैने सारे नाते, इस बैरी जग के |
अब आ जाओ मनमोहन, मेरे मन मंदिर में ||



:-Shekhar Kumawat

पहले प्यार का गम......


पहले प्यार का गम किसे नहीं होता |
आखरी सलाम का दर्द किसे नहीं होता ||

उस नादानी की सजा उम्र भर मिलती है |
जबभी यादों का समंदर उफान पर होता ||


:-Shekhar Kumawat

दुनियां भी कुछ कुछ कहती है.............

अब खामोश निगाहें भी कुछ कहती है |
क्यूँ ये मुस्कुराते होठ भी कहते है ||

ये कोनसी आग लगाई तुमने दिल में |
जो ये दुनियां भी कुछ कुछ कहती है ||




Shekhar Kumawat

उठा भी दो पर्दा...........

कोई बात तो होगी मुझमे भी|
लगन लगी है
जो तुझमे भी ||

उठा भी दो पर्दा अब चहरे से |
प्रीत जगी है अब मुझमे भी ||


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शेखर कुमावत

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