ना चाहूँ जहाँ में इस कदर.........



ना दिखा सकता ये दर्द- ए- दिल किसी को |
ना सुना सकता ये गमे दास्ताँ किसी को ||

है आखरी
गुजारिश, मेरे खुदा तुझसे |
ना चाहूँ जहाँ में इस कदर फिर किसी को ||




:- शेखर कुमावत


37 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब शेखर जी।

    प्रिय उदय प्रताप हयात कि पंक्तियाँ याद आतीं हैं -

    हर बार अपना दर्द बताना नहीं अच्छा
    और जख्म हैं ऐसे कि छुपाना नहीं अच्छा

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  2. शेखर, लिखा बहुत अच्छा है, लेकिन भाई बीस साल की उमर में ऐसा सोचोगे तो कैसे चलेगा? खुदा से मांगना है तो ये मांगों कि सबको इतनी ही शिद्दत से चाहो।

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  3. प्यार बड़ा दर्द देता है.इस विषय पर आपके लागातार लेखन से लगता है आप शायर बन जायेंगे..............वैसे शादी नहीं लगता है..जीवन की भागादौड़ी में ये सभी कुछ गुल हो जाता है.
    अपनी माटी
    माणिकनामा

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  4. Chahat kayi baar behad dard pahunchati hai...khoobsoorat alfaaz!

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  5. दर्द को खूबसूरती से कहा है..

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  6. बढ़िया लिखा है ..पर जीवन में दुखी ना हो ...शायरी में चाहे रो लो

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  7. काश यही शिद्दत समूचे जहां को अपनी जद में लेले...
    बेहतर...

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  8. thode lafzon mein gahri baat kah di.........kal ke charcha manch par aapki prastuti hogi.

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  9. सच है किसी को चाहना दुख देता है ...
    अच्छा शेर है बहुत ...

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  10. वाह बहुत ही खूबसूरती से और शानदार रूप से आपने दर्द को बयान किया है! बहुत खूब!

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  11. तुम्हारी चार लाइनों का असर किसी ग़ज़ल से कम नहीं होता. बहुत सुंदर लिखा है.
    शुभकामनाएं.

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  12. kaash ye mumkin hota ki ham chahat bhi tol mol kar kar paate ........

    bahut achcha likha hai

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  13. संभवतः पहली बार इस ब्लाग पर पहुँचा हूँ। इस पर आते रहना होगा।

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  14. हमेशा की तरह आपकी रचना जानदार और शानदार है।

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  15. यदि यह सचमुच प्यार होता तो आप इस क़दर टूटे न होते।

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  16. अच्छा लिखा है शेखर! उन्नीस साल पहले जब मैं उन्नीस साल का था तब मैंने भी ऐसा ही बहुत कुछ लिखा था. समय के साथ लेखन में बदलाव आता है. बदलाव आना ज़रूरी है. प्यार हो या न हो, टूटे या सलामत रहे, शायर युवक ऐसा लिखता ज़रूर है. आभार.

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  17. भाई शेखर, इत्ती सी उमर और इत्ते भारी विचार...
    भैया बहुत नाम कमाओगे, आगे चलकर...

    शुभकामनाएं और बधाई...

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  18. इस दर्द को अपनी शक्ति बनाओ ..........वैसे बढ़िया लिखते हो शुभकामनाएं !!

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  19. kyaa waqt hai ji aapke blog par aane kaa....


    jo bhi ho...tumhein aasherwaad....

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  20. होता है ऐसा भी होता है ।

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  21. शायरी रुपी ..यह रचना बहुत पसंद आई.....

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