तेरा ही चेहरा भाया

कैसा उल्फत का जूनून, मेरे दिल में समाया |
हजारो चहरो में , बस तेरा
ही चेहरा भाया ||

कदम कदम पर ठोकरें इम्तिहां मेरा लेती रही |
हार कर उन्हींने, रास्ता तेरे घर का दिखाया ||

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शेखर कुमावत

18 टिप्‍पणियां:

  1. "हर कदम पर ठोकर , हर पत्थर ने समझाया |
    देख हाले दिल उन्हीने रास्ता तेरे घर का दिखाया ||"

    bahut khoob....

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  2. कैसा अजीब ये जूनून, मेरे दिल में समाया |
    हजारो चहरो में बस तेरा ही चेहरा .........sundar rachna.

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  3. hay sundarta har kisi ke chahre par hoti hai lekin usko dekhne ke liye aankhone me wo shaksiyat honi chahiye jo us khoobsoorti ho pehchan sake

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  4. वाह! अच्छी रचना लेकिन....... कुछ जल्दी खत्म हो गयी ...
    बधाई .......

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  5. Rafta-Rafta Mohabbat ke Adaab bhi aa jayenge,
    Pehle Dil Zubaan par rakho, phir ashaar bhi aa jayenge.

    [Acchi koshish kar rahe ho Mere Dost. Maaf karna mujhe to Thokaron ne Shaayri ke Hawale kiya tha aur Tum Mohabbat ka raasta ikhtiyar kar rahe ho.......Khir ! Ye raasta bhi tumhe aakhir mera Humraah bana dega. ALL THE BEST DEAR].

    Waise, January-2010 me BHILWADA se CHITTOD ke beech main bhi kuch HAAR aaya hun DOST. Bahut Mohabbat hai Rajasthan kii MITTI ME.

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  6. सुन्दर रचना खास कर दूसरी वाली

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  7. बहुत ही खूबसूरत रचना है, बहुत ही सुंदर लिखते रहें शुभकामनाएं

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  8. har man ko bha jaye, es trah s samjaya.
    chahra hi hakikat nahi hoti, shabd hote h man ki bhasha.
    your poem is too good.

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  9. आपकी रचनायें दिल को छू जाती हैं ! बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति है ! बधाई !

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  10. बेहतरीन भावो से ओतप्रोत पक्तिंयाँ

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  11. फिर पहाड़ों से दरिया बहे दूध का
    दिल में फ़रहाद-सा हो अगर हौसला.

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